ऑनलाइन जन्म कुंडली बनाने के लिए आपको बस तीन जानकारियाँ चाहिए: अपनी जन्म तिथि, जन्म समय और जन्म स्थान। इन्हें किसी मुफ़्त कुंडली मेकर में भरें, बटन दबाएँ, और कुछ ही सेकंड में आपकी जन्म कुंडली सामने आ जाती है: लग्न कुंडली, नौ ग्रह, आपका नक्षत्र और दशा की अवधियाँ, सब एक साथ। यह गाइड एक-एक कदम पर बताती है कि जन्म कुंडली कैसे बनाएं (janam kundli kaise banaye), और यह भी समझाती है कि हर जानकारी कुंडली पर क्या असर डालती है।
कुंडली बनाने के लिए क्या चाहिए?
कुंडली बनाने के लिए तीन चीज़ें चाहिए: जन्म तिथि, जन्म समय और जन्म स्थान। नाम ज़रूरी नहीं है, वह केवल कुंडली पर छपता है।
कुंडली आपके जन्म के ठीक उस मिनट और उस जगह के आकाश का नक्शा है। जन्म तिथि से तय होता है कि धीमी चाल वाले ग्रह कहाँ थे। जन्म समय से तय होता है कि पूर्व दिशा में कौन सी राशि उदित हो रही थी, और इसी को लग्न कहते हैं। जन्म स्थान से अक्षांश, देशांतर और टाइम ज़ोन मिलते हैं, जिनसे आपकी घड़ी का समय जन्म के असली क्षण में बदला जाता है।
| जानकारी | क्यों ज़रूरी है | अगर ठीक-ठीक पता न हो |
|---|---|---|
| जन्म तिथि | नौ ग्रहों को उनकी राशियों और नक्षत्रों में रखती है | गलत तिथि से लगभग सब कुछ बदल जाता है |
| जन्म समय | लग्न, 12 भाव और दशा की तारीखें तय करता है | चंद्र राशि आमतौर पर सही रहती है; लग्न और भाव नहीं |
| जन्म स्थान | अक्षांश, देशांतर और टाइम ज़ोन देता है | उसी ज़िले का पास का कस्बा लगभग वही कुंडली देता है |
| नाम (वैकल्पिक) | आपके रिकॉर्ड के लिए कुंडली पर छपता है | किसी भी गणना में इस्तेमाल नहीं होता |
नाम केवल पहचान के लिए होता है। इससे किसी भी ग्रह की स्थिति ज़रा भी नहीं बदलती, इसीलिए केवल नाम से असली कुंडली नहीं बन सकती। इसके बारे में हमने नाम से कुंडली वाले लेख में समझाया है।
ऑनलाइन जन्म कुंडली कैसे बनाएं: एक-एक कदम
जन्म तिथि, समय और स्थान भरें, सूची से अपना स्थान चुनें और “मेरी कुंडली बनाएँ” दबाएँ। मुफ़्त कुंडली मेकर पर इस पूरे काम में लगभग एक मिनट लगता है। जन्म कुंडली कैसे निकाले, इसका पूरा तरीका इन पाँच कदमों में है:
- अपनी जन्म तिथि भरें। वही तारीख डालें जो आपके जन्म प्रमाणपत्र पर लिखी है।
- अपना जन्म समय भरें। जन्म प्रमाणपत्र या अस्पताल के रिकॉर्ड में लिखा समय डालें। अगर आपको बस “सुबह” या “करीब 10 बजे” जैसा कुछ पता है, तो जो सबसे नज़दीकी समय पता हो वही भरें, और नीचे जन्म समय वाला हिस्सा ज़रूर पढ़ें।
- जन्म स्थान लिखें और सूची से चुनें। सूची में लगभग 7,500 स्थान हैं: भारत के 3,502 स्थान और दुनिया भर के 4,001 शहर। स्थान चुनते ही अक्षांश, देशांतर और टाइम ज़ोन अपने आप भर जाते हैं।
- “मेरी कुंडली बनाएँ” दबाएँ। पूरी जन्म कुंडली इसी पेज पर दिख जाती है।
- चाहें तो चार्ट की शैली बदलें। हर चार्ट उत्तर भारतीय या दक्षिण भारतीय शैली में देखा जा सकता है।
अगर आपका जन्म स्थान सूची में नहीं है, तो उन्नत खोलें और अक्षांश व देशांतर खुद भरें। इसी उन्नत बॉक्स में आप पुरानी भारतीय घड़ी भी चुन सकते हैं। कुछ वर्षों में हुए जन्म के लिए यह बात मायने रखती है (नीचे गलतियों वाला हिस्सा देखें)।
मोबाइल में जन्म कुंडली कैसे बनाएं?
मोबाइल में कुंडली ठीक उसी तरह बनती है जैसे कंप्यूटर पर, बस फ़ोन के ब्राउज़र में। फ़ोन के Chrome या Safari ब्राउज़र में मुफ़्त कुंडली मेकर खोलें, जन्म तिथि, समय और स्थान भरें, और मेरी कुंडली बनाएँ दबाएँ। यह पेज फ़ोन की स्क्रीन के हिसाब से भी बना है, इसलिए कोई कुंडली ऐप इंस्टॉल करने की ज़रूरत नहीं है। कुंडली की कॉपी फ़ोन में रखने के लिए नतीजे के नीचे PDF सेव करें / प्रिंट करें दबाएँ। Android और iPhone, दोनों के कदम हमारी कुंडली PDF गाइड में दिए गए हैं।
कुंडली की गणना कैसे होती है?
हमारा इंजन पहले यह निकालता है कि आपके जन्म के क्षण में सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु कहाँ थे। फिर हर स्थिति को लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश से निरयन राशिचक्र में बदला जाता है। यही अयनांश भारतीय खगोलीय पंचांग का मानक है। जन्म के समय पूर्वी क्षितिज पर जो राशि उदित हो रही थी, वही लग्न यानी पहला भाव बनती है।
इसके बाद तीन और चीज़ें तय होती हैं:
- भाव: लग्न की राशि से शुरू करके बारहों राशियों में से हर राशि एक भाव बनती है (पूर्ण राशि भाव)।
- नक्षत्र: चंद्रमा का सटीक अंश आपका जन्म नक्षत्र और उसका पद तय करता है।
- दशा: विंशोत्तरी दशा का पूरा क्रम इस बात से शुरू होता है कि जन्म के समय चंद्रमा अपने नक्षत्र में कितना आगे बढ़ चुका था। इसीलिए जन्म समय में छोटा सा बदलाव भी आपकी दशा की तारीखें खिसका देता है।
क्या हाथ से कुंडली बनाई जा सकती है?
हाँ। कंप्यूटर आने से पहले ज्योतिषी हर कुंडली हाथ से बनाते थे। इसके लिए दो छपी हुई चीज़ें काम आती थीं: एफ़ेमेरिस, यानी वह किताब जिसमें हर दिन की ग्रह स्थिति लिखी होती है, और जन्म स्थान के अक्षांश के लिए लग्न सारणी (table of ascendants)। इस तरीके में पाँच कदम होते हैं:
- जन्म के समय को जन्म स्थान के स्थानीय नाक्षत्र समय (sidereal time, यानी तारों के हिसाब से चलने वाला समय) में बदलें।
- उस नाक्षत्र समय और अक्षांश के लिए सारणी से उदित राशि और उसका अंश पढ़ें। यही लग्न है।
- एफ़ेमेरिस से जन्म तिथि की ग्रह स्थितियाँ लिखें, और जन्म के घंटे के हिसाब से उनमें बदलाव करें। चंद्रमा पर सबसे ज़्यादा ध्यान देना पड़ता है, क्योंकि वह एक दिन में लगभग 13 अंश चलता है।
- पक्का करें कि हर स्थिति निरयन हो। अगर किताब में पश्चिमी (सायन) स्थितियाँ दी हों, तो उनमें से अयनांश घटा दें।
- हर ग्रह को उसके भाव में रखें, चंद्रमा का नक्षत्र निकालें, और चंद्रमा के अंश से जन्म के समय की शेष दशा निकालें।
हर कदम आसान है, लेकिन हिसाब लंबा है, और एक छोटी सी चूक से कोई ग्रह या लग्न अपनी जगह से खिसक जाता है। कुंडली मेकर यही सारे कदम एक सेकंड से भी कम समय में पूरे कर देता है।
मुफ़्त कुंडली में क्या-क्या मिलता है?
इस साइट की पूरी मुफ़्त कुंडली में ये सब एक ही पेज पर मिलता है:
- उत्तर और दक्षिण भारतीय शैली में लग्न (D1) और नवांश (D9) कुंडली
- नौ ग्रहों की राशि, अंश, नक्षत्र, पद और भाव, साथ में वक्री, अस्त और उच्च-नीच स्थिति की जानकारी
- जन्म के समय का पंचांग: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण
- विंशोत्तरी महादशा और अंतर्दशा की तारीखें, और आज चल रही दशा
- लग्न, चंद्र और शुक्र से जाँचा गया मांगलिक दोष, साथ में काल सर्प दोष और साढ़ेसाती की स्थिति
नई कुंडली में सबसे पहले क्या देखें
सबसे पहले नतीजे में ऊपर के चार खाने देखें: आपका लग्न, आपकी चंद्र राशि, पद के साथ आपका जन्म नक्षत्र, और आपकी सूर्य राशि। इसके बाद लग्न और नवांश कुंडली हैं, और नौ ग्रहों की तालिका (ग्रह स्थिति), जिसमें दिखता है कि हर ग्रह किस भाव में बैठा है। थोड़ा नीचे विंशोत्तरी दशा की तालिका है, जिसमें आज चल रही अवधि के साथ अभी चल रही का निशान लगा होता है। आख़िर के पास दोष वाले हिस्से में मांगलिक, काल सर्प और साढ़ेसाती की जाँच एक ही जगह मिल जाती है।
ऑनलाइन कुंडली कितनी सटीक होती है?
ऑनलाइन कुंडली उतनी ही सटीक होती है जितनी दो चीज़ें: सॉफ़्टवेयर का गणित और आपके भरे हुए जन्म विवरण। इसलिए दोनों का सही होना ज़रूरी है।
गणित की बात करें तो हमारे इंजन को 1900 से 2050 तक के 404 जन्म क्षणों पर स्विस एफ़ेमेरिस से मिलाकर जाँचा गया है। स्विस एफ़ेमेरिस वही संदर्भ है जिसे ज़्यादातर ज्योतिष सॉफ़्टवेयर इस्तेमाल करते हैं। सबसे बड़ा अंतर चंद्रमा में 11 विकला (आर्कसेकंड) और किसी भी ग्रह में 14 विकला रहा। एक विकला एक अंश का 1/3600 भाग होता है। यह अंतर इतना छोटा है कि सामान्य हालात में इससे कोई ग्रह दूसरी राशि या दूसरे नक्षत्र में नहीं जाता।
जन्म विवरण की तरफ़ सबसे ज़्यादा असर जन्म समय का होता है। 15 अगस्त 1990, जयपुर के एक परीक्षण जन्म में समय 10:00 से 11:00 करने पर लग्न कन्या से तुला हो गया, और अगली महादशा की शुरुआत 163 दिन खिसक गई। पूरा परीक्षण बिना जन्म समय के कुंडली वाले लेख में दिया गया है।
क्या केवल जन्म तिथि से कुंडली बन सकती है?
हाँ, केवल जन्म तिथि और जन्म स्थान से आप अधूरी कुंडली बना सकते हैं। इसमें चंद्र राशि आमतौर पर सही रहती है, क्योंकि चंद्रमा हर राशि में लगभग सवा दो दिन रहता है।
लग्न, भाव और दशा की सटीक तारीखों पर भरोसा नहीं किया जा सकता, क्योंकि लग्न एक ही दिन में बारहों राशियों से गुज़र जाता है। बिना जन्म समय के कुंडली बनाने वाली हमारी गाइड बताती है कि ऐसे में कौन सी बातें फिर भी काम आती हैं।
कुंडली बनाते समय होने वाली आम गलतियाँ
ज़्यादातर गलत कुंडलियाँ गणना की वजह से नहीं बनतीं। वे जानकारी भरते समय हुई छोटी चूक से बनती हैं:
- AM और PM में गड़बड़। शाम के 7:30 का मतलब है 19:30। बटन दबाने से पहले समय वाला खाना एक बार जाँच लें।
- एक ही नाम का गलत कस्बा। भारत के कई कस्बों के नाम एक जैसे हैं। सूची में हर नाम के साथ उसका अक्षांश और देशांतर दिखता है, इसलिए वही चुनें जो आपके कस्बे से मेल खाता हो।
- पुरानी भारतीय घड़ियाँ। 1941 से 1945 तक भारत में “युद्धकालीन समय” (war time) चलता था, जो IST (भारतीय मानक समय) से एक घंटा आगे था। हमारा कुंडली मेकर भारतीय स्थानों के लिए इसे अपने आप लगा देता है। कुछ पुराने रिकॉर्ड बॉम्बे टाइम या कलकत्ता टाइम में लिखे होते हैं। अगर आपके परिवार के रिकॉर्ड में ऐसा लिखा है, तो इन्हें उन्नत में चुनें।
- विदेश में डेलाइट सेविंग (गर्मियों में घड़ी आगे करना)। भारत से बाहर हुए जन्म के लिए सूची से शहर चुनते ही उस साल के वहाँ के घड़ी के नियम अपने आप लग जाते हैं।
- दूसरे कैलेंडर में लिखी तारीख। परिवार के रिकॉर्ड में कभी-कभी अंग्रेज़ी तारीख की जगह हिंदू तिथि और महीना लिखा होता है। ऐसे में पहले उसे अंग्रेज़ी तारीख में बदल लें, फिर कुंडली बनाएँ।
अपनी कुंडली सेव या प्रिंट कैसे करें?
अपनी कुंडली के नीचे PDF सेव करें / प्रिंट करें दबाएँ। प्रिंट विंडो खुलेगी, जिसमें पेज पर केवल आपकी कुंडली होगी। वहाँ Save as PDF चुनकर आप उसकी मुफ़्त कॉपी अपने फ़ोन या कंप्यूटर में रख सकते हैं।
फ़ोन और कंप्यूटर, दोनों पर कुंडली सेव करने की पूरी जानकारी हमारी फ्री कुंडली PDF, ऐप या सॉफ़्टवेयर वाली गाइड में है।
कुछ सवाल, सीधे जवाब
क्या ऑनलाइन जन्म कुंडली बनाना मुफ़्त है? हाँ। इस साइट पर पूरी कुंडली मुफ़्त है, इसके लिए साइन-अप नहीं करना पड़ता, और आप जितनी चाहें उतनी कुंडलियाँ बना सकते हैं।
क्या मेरा जन्म विवरण सेव होता है? नहीं। मुफ़्त कुंडली की गणना आपके अपने ब्राउज़र में ही होती है, इसलिए आप जो जन्म विवरण भरते हैं, वह हमारे सर्वर पर नहीं भेजा जाता।
उत्तर भारतीय या दक्षिण भारतीय, कौन सा चार्ट बेहतर है? दोनों में वही ग्रह उन्हीं राशियों में दिखते हैं। उत्तर भारतीय चार्ट में भाव अपनी जगह स्थिर रहते हैं और लग्न सबसे ऊपर होता है; दक्षिण भारतीय चार्ट में राशियाँ अपनी जगह स्थिर रहती हैं। वही शैली चुनें जो आपके पारिवारिक ज्योतिषी इस्तेमाल करते हैं।
तैयार हैं? अभी अपनी मुफ़्त कुंडली बनाएँ, और सटीक समय के लिए अपना जन्म प्रमाणपत्र पास रखें।